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कार्तिक ने मैजिकल परफॉर्मेंस से किया ‘काला जादू’,पैसा वसूल है ‘फ्रेडी’

Editor Editor
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कार्तिक आर्यन और अलाया एफ की फ्रेडी एक बढ़िया टाइमपास फिल्म है, जिसे आप फैमिली के साथ भी एन्जॉय कर सकते हो। फिल्म में कार्तिक आर्यन का एक नया एक्टिंग शेड आपको देखने को मिलेगा।

क्या है कहानी:ये फिल्म डॉ. फ्रेडी जिनवाला (कार्तिक आर्यन) की कहानी है, जो काफी अकेला है और उसका बेस्ट फ्रेंड उसका कछुआ ‘हार्डी’ है। फ्रेडी जीवन में एक दम अकेला है, मेंटली बाकी लोगों से थोड़ा अलग है, जिसकी वजह उसका चाइल्ड हुड ट्रॉमा है। दिल का बेहद नेक और हमेशा सभी की मदद करने की कोशिश करने वाला फ्रेडी, करीब 4-5 साल से डेटिंग एप पर है लेकिन फिर भी सिंगल है। फिर धीरे से फ्रेडी की जिंदगी कैनाज़ (अलाया एफ) की एंट्री होती है, जो शादीशुदा है और पति से हर दिन मार खाती है।

धीरे धीरे फ्रेडी और कैनाज को एक दूसरे से प्यार हो जाता है और इसके बाद फ्रेडी, कैनाज के पति को मार देता है। कहानी में असली ट्विस्ट इसके बाद आता है, जब उसे पता लगता है कि कैनाज किसी और से प्यार करती है और सिर्फ पति को रास्ते से हटाने के लिए फ्रेडी का फायदा उठाया। अब इसके बाद क्या फ्रेडी, कैनाज को माफ करता है या फिर बदला लेता है… क्या फ्रेडी हमेशा कैनाज को याद करता रह जाएगा या फिर उसे सबक सिखाएगा और क्या पुलिस को ये पता लग पाएगा कि कैनाज के पति को किसने मारा…। इन सभी सवालों के जवाब के लिए आपको फ्रेडी देखनी होगी।

कैसी है एक्टिंग और निर्देशन:फ्रेडी से पहले कार्तिक आर्यन, फिल्म भूल भुलैया 2 को लेकर खूब वाहवाही लूट रहे थे और उन्हें बॉलीवुड सेवियर भी कहा जा रहा था। कार्तिक का जादू फ्रेडी में भी चला है, या कह सकते हैं कि ‘काला जादू।’ फ्रेडी में कार्तिक ने एक ओर जहां फिजिकल मेहनत की किरदार में जान डालने के लिए तो दूसरी ओर बतौर आर्टिस्ट भी वो खरे उतरते हैं। कार्तिक के इंटेंस एक्सप्रेशन्स सीन्स को और मैजिकल करते हैं। कार्तिक ने इस तरह का कभी कुछ किया नहीं हैं और इस टेस्ट में भी वो पास होते हैं। कार्तिक के अलावा अलाया का भी काम अच्छा है। मासूमियत और निगेटिव, दोनों ही अंदाज में वो जचती हैं, लेकिन कई बार उनकी एक्टिंग ऑन-ऑफ होती दिखती है। बात अलाया और कार्तिक के बाद निर्देशक शशांक घोष की करें तो फिल्म दर फिल्म उनका काम पहले से बेहतर होता दिख रहा है। इस फिल्म में उनका काम अच्छा है, हालांकि कुछ बारीकियों में कमी रह गई है, लेकिन बतौर दर्शक वो उतना मायने नहीं रखती हैं।

क्या कुछ है खास और कहां खाई मात:फिल्म का दूसरा हाफ पहले से ज्यादा एक्साइटिंग हैं और इंटरवेल के दौरान का ट्विस्ट अच्छा है, जो वाकई आपको उत्साहित करता है। फिल्म का कैमरा वर्क और एडिटिंग काफी अच्छी है और जिस तरह से सीन्स को डेप्थ दी गई है, वो बतौर दर्शक आपको बांधे रखता है। वहीं फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड म्यूजिक भी सीन्स को मजबूती देता है। फिल्म के कुछ डायलॉग्स अच्छे हैं और वन लाइन्स में ही डीप इम्पैक्ट देते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि सब कुछ अच्छा ही है। फिल्म का पहला हाफ स्लो है और फ्रेडी के किरदार को बिल्ड करने में टाइम लगता है। ये समझने में काफी वक्त लगता है कि आखिर फ्रेडी ऐसा क्यों हैं, जो आखिर में भी कोई बड़ा सस्पेंस नहीं समझ आता है, इसे शुरुआत में ही दिखाने पर किरदार कम समय में अच्छा बिल्ड हो सकता था।

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