शख्स ने गोबर का व्यापार करके करोड़ों रुपये कमा लिये, ये गोबर के बने 70 से अधिक उत्पाद बेचते हैं

शख्स ने गोबर का व्यापार करके करोड़ों रुपये कमा लिये, ये गोबर के बने 70 से अधिक उत्पाद बेचते हैं

भारत देश में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, गाय से प्राप्त तत्व जैसे गोबर गोमूत्र और दुग्ध सबसे पवित्र माना जाता है। पूजा स्थानों में भी सबसे पहले गाय के गोबर का पूजन किया जाता है, उनके स्थान को गाय के गोबर से लीप कर शुद्ध माना जाता है।
गाय से प्राप्त तत्व वर्तमान समय में व्यापार का एक माध्यम बन गया है। यह माध्यम लोगों को कुछ ही समय में करोड़पति बना देता है, तो इसी कड़ी में आज हम एक ऐसे व्यक्ति की बात करेंगे, जिसने गाय के गोबर से 70 प्रकार के अलग-अलग उत्पादों का निर्माण किया।
Cows and cow dung file photo.पूरी तरह रसायन फ्री होने के कारण आज उनकी मांग दिन-व-दिन बढ़ती चली जा रही है। वह शख्स इन उत्पादों से 50 प्रतिशत तक का लाभ कमाता है। तो आइए जाने इस लेख के माध्यम से कौन है, वह व्यक्ति और किस तरह यह आइडिया उनके दिमाग में आया।

राजस्थान राज्य के जयपुर के भीमराज शर्मा, की सफलता की कहानी
राजस्थान (Rajasthan) राज्य के जयपुर (Jaipur) शहर से लगभग 20 KM की दूरी पर भीमराज शर्मा (Bhimraj Sharma) ने गोबर से पेपर निर्मित करने की एक फैक्ट्री लगा रखी है। जयपुर रेलवे स्टेशन से इस पेपर फैक्ट्री की दूरी महज 4 किलोमीटर है। राजस्थान के जयपुर सुदर्शनपुरा इंडस्ट्रियल इलाका है, जो केवल प्रिंटिंग प्रेस के लिए प्रसिद्ध है।

इसी एरिया में गोबर के व्यापार (Cow Dung Business) के हीरो भीमराज शर्मा (Bhimraj Sharma) की भी फैक्ट्री है। 50 वर्षीय भीमराज शर्मा प्रिंटिंग प्रेस के काम के साथ गोबर से निर्मित पेपर से कई तरह के स्टेशनरी के उत्पाद बनाते हैं, जो उनकी खासियत है।
दिवाली के शुभ अवसर पर भीमराज ने गोबर से लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां और दीए तैयार किए और बाजार में उन्हें बेचे उनके दीए और मूर्तियों की मांग बाजार में बिक रहे विदेशी सामानों से ज्यादा रही।

भीमराज बताते हैं कि दीपों के त्योहार में उनके द्वारा निर्मित दिए और मूर्तियों की काफी ज्यादा मांग होती है उनके साथ हमेशा ऐसा होता है कि वे ग्राहकों की मांग तुरंत पूरी नहीं कर पाते, क्योंकि उनके द्वारा बनाया गया उत्पाद कुछ ही समय में पूरा बिक जाता है।
दूध ना देने वाली गायों के साथ होने लगा था अत्याचार

भीमराज बताते हैं कि एक गाय का जीवन करीब 15 वर्ष का होता है, जिसमें से वे मात्र 5 वर्ष तक ही दूध देने योग्य रहती है। और 10 वर्ष वे दूध देने में असमर्थ रहती है। परंतु गाय का अमृत रूपी गोबर उनके जीवन के आखिरी क्षणों तक लोगो को प्राप्त होता है।
पहले के समय में गोबर का उपयोग केवल कंडे (Cow Dung Kande) बनाने के लिए या फिर गोबर गैस बनाने के लिए उपयोग किया जाता था और बरसात के दिनों में तो ना गोबर का खाद बन पाता था और ना ही कंडे बन पाते थे, इसके लिए लोग दूध ना देने वाली गायों को सड़क पर दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देते थे। कई बार तो ऐसी गाय हादसे का शिकार भी हो जाती थी।

Cows Eating Crops.इस स्थिति से निपटने के लिए उसका तोड़ निकाला गया। जगह जगह गाय के गोबर से जैविक खाद और कई तरह के दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों का निर्माण होने लगा, इससे गाय को भी रहने के लिए एक निश्चित स्थान मिला। वे अब आवारा सड़कों पर नहीं घूमती, बल्कि एक निश्चित जगह पर निवास करती है और अच्छे से खाती पीती है।

भीमराज शर्मा बताते हैं कि वे टेलीविजन में एक प्रोग्राम देख रहे थे, उसी दौरान उन्होंने राजीव दीक्षित का एक इंटरव्यू सुना जिसमें उन्होंने आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर गाय के तत्वों के फायदे बताए। उन्होंने यह भी सुना कि अफ्रीका में हाथी के मल से कुछ ऐसे प्रोडक्ट बन रहे हैं, जो काफी ज्यादा उपयोगी हैं, तो उन्होंने भी सोचा क्यों ना गाय के गोबर से कुछ चीजों का निर्माण किया जाए जो पूरी तरह इको फ्रेंडली होते हैं।

वर्ष 2016-17 में भीमराज में गाय के गोबर से पेपर निर्माण करने का फैसला लिया। शुरुआत में लोग उनके द्वारा निर्मित पेपर को डस्टबिन में फेंक दिया करते थे, वह बोलते थे, इन अजीब से पेपरों को कौन खरीदेगा और उपयोग करेगा।

लोग उन्हें पागल करार देने लगे
वे बताते हैं कि जब उन्होंने अपने परिवार में और अपने रिश्तेदारों में बताया कि वे गोबर से पेपर का निर्माण करेंगे तो उनके घर वालों रिश्तेदारों और दोस्तों ने उनका बहुत बुरी तरह मजाक बनाया और उन्हें पागल तक करार दे दिया।

यहां तक की भीमराज के बड़े भाई ने उन्हें पागलखाने में भर्ती कराने की तक एडवाइज दे दी। परंतु उन्होंने लोगों की बातों का बुरा नहीं माना और वह अपनी मेहनत में लग गए। शुरुआत में उन्हें डर था कि कहीं वह अपने काम में असफल ना हो जाए वरना अच्छा खासा जमा जमाया प्रिंटिंग प्रेस का काम भी उनका ठप हो जाएगा।

परंतु उन्होंने हिम्मत की और अपना काम शुरू किया, पहले तो मशीन खुद से निर्माण करने की कोशिश की फिर मशीन को आर्डर पर बनवाया और पहला पेपर बनाया तो वह कुछ आड़ा टेड़ा बना, यह देखकर उनके रिश्तेदारों ने उनका और ज्यादा मजाक बनाया उन्हें निराश करने की कोशिश की।

परंतु आज वही व्यक्ति जिसे लोगों ने पागल करार दिया, उसने इस कारोबार से करोड़ों का व्यापार खड़ा कर दिया। रिश्तेदारों से पैसे मांगे परंतु उन्होंने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। कहते हैं सफलता के लिए इंसान को पागल ही बना होता है, एक समझदार आदमी कभी भी उस ऊंचाई को नहीं छू सकता।

भीमराज वर्तमान समय में गोबर से निर्मित पेपर के साथ-साथ 70 प्रकार के गोबर से निर्मित उत्पाद बना रहे हैं और बाजार में उन्हें अच्छे दामों में बेच भी रहे हैं। वे बताते है कि लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन जैसे बड़े इंस्टीट्यूट से भी उन्हें पेपर, डायरी, किताब, कैलेंडर, ग्रीटिंग कार्ड, फाइल, फोल्डर आदि जैसे उत्पादों के लिए आर्डर मिल रहे है।

कैसे बनाते हैं गोबर से पेपर
भीमराज बताते हैं कि वे गाय के ताजे गोबर का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि पुराने गोबर में कीड़े पड़ जाने की स्थिति में उसका उपयोग करना असंभव होता है। पेपर बनाने के लिए वे एक मशीन के माध्यम से कुछ कपड़े को बारीक कतरन के रूप में परिवर्तित कर लेते हैं।
फिर उसने 50 फीसदी गोबर मिलाते हैं, गोबर और कपड़े को अच्छी तरह प्रोसेस किया जाता है। लगभग ढाई से 3 घंटे प्रोसेस करने के बाद कपड़ा और गोबर एक पल्प में परिवर्तित हो जाता है। उस पल्प को एक टैंक में ट्रांसफर कर लेते हैं, फिर उस पल्प को जालिनुमा फ्रेम में फैला देते हैं और प्रेशर मशीन की सहायता से उस पल का पानी निकाल लिया जाता है।

फिर उस फ्रेम को धूप में सुखाया जाता है। 24 घंटे में सूखने के बाद वह पेपर में परिवर्तित हो जाता है। भीमराज के व्यापार में अब उनके बच्चे भी उनका सपोर्ट कर रहे हैं। भीमराज की बिटिया जागृति वर्चुअल आर्ट में ग्रेजुएट है और वे प्रोडक्ट डिजाइन और मॉडिफिकेशन की गुरु है।

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