जलकुंभी का हल नहीं निकाल पा रहे थे लोग, असम की लड़कियों ने उसी से बना दिए योगा मैट

जलकुंभी का हल नहीं निकाल पा रहे थे लोग, असम की लड़कियों ने उसी से बना दिए योगा मैट

जलकुंभी (Water Hyacinth) भारत के झीलों में बहुतायत में पाए जाते हैं. जलकुंभी अमेज़न वर्षावनों में पाया जाता था और पहले अंग्रेज़ गवर्नर जनरल की पत्नी Lady Hastings इसे भारत ले आईं. अब इसे टेरर ऑफ़ बंगाल (Terror of Bengal) कहा जाता है. जलकुंभी पानी में मौजूद ऑक्सिजन ले लेती है और उस पानी में मछलियां और अन्य जलजीव नही बचते. करोड़ों रुपये ख़र्च करने के बावजूद आज तक जलकुंभी का कोई स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है.

असम की 6 लड़कियों ने खोज लिया जल कुंभी का हल
असम के दिपोर बील (Deepor Beel) झील में भी जलकुंभी बढ़ती जा रही थी. इस झील में कई तरह के माइग्रेटरी पक्षी भी आते हैं. जलकुंभी की समस्या को हमेशा के लिए ख़त्म करने का हल निकाला है असम की 6 लड़कियों (मिताली दास रोमी दास, भानिता दास, सीता दास और मामोनी दास) ने. इन लड़कियों ने जलकुंभी से बायोडिग्रेडेबेल योगा मैट (Biodegradable Yoga Mat) बना लिया है. इस बेहतरीन प्रोजेक्ट का नाम रखा गया है, “सीमांग”

एक साल की मेहनत के बाद बना योगा मैट
The Hindu के एक लेख के अनुसार, लगभग एक साल की मेहनत के बाद यह योगा मैट बनकर तैयार हुआ. इस मैट का नाम दिपोर झील पर आने वाली एक प्रवासी पक्षी, Purple Moorhen के नाम पर काम सोराई (Kaam Sorai) रखा गया है.

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