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भोजपुरी फिल्मों के गॉड फादर नजीर हुसैन जिन्होंने बनाई पहली भोजपुरी फिल्म , लेकिन ऐसा हुआ जो अंग्रेज़ो ने सुनाई सजा-ए-मौत : देखे Photos

admin
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नजीर हुसैन का जन्म 15 मई 1922 में हुआ था और 65 वर्ष की आयु में उन्होंने 16 अक्टूबर 1987 में आखिरी सांसे ली थीं। उनके पिता शाहबजाद खान रेलवे में गार्ड थे और हुसैन लखनऊ में पले-बढ़े. उन्होंने खुद कुछ महीनों के लिए रेलवे में एक फायरमैन के रूप में काम किया और जल्द ही द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में शामिल हो गए थे।

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आपको बता दे की उन्हें मलेशिया और सिंगापुर में तैनात किया गया था जहां वे युद्ध बंदी बन गए थे। वहां से आजाद होने के बाद वह सुभाष चंद्र बोस के प्रभाव में आ गए और आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे।

रिपोर्ट्स की माने तो उन्हें अंग्रेजों ने सजा-ए-मौत सुनाई थी और उन्हें फांसी देने के लिए दिल्ली लेकर जा रहे थे, तभी उनके साथियों ने ट्रेन पर हमला कर उन्हें अंग्रेजों की चंगुल से छुड़ा लिया।

बता दे कि आजादी से कुछ साल पहले अंग्रेजों ने नजीर को फिर से बंदी बना लिया और सभी जगह यह खबर फैल गई थी कि अंग्रेजों के हाथों वह मारे गए, लेकिन उन्हें अंग्रेजों को चकमा देना अच्छे से आता था और वह फिर से अंग्रेजों के हाथों भाग निकले थे।

आपको बता दे की उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया गया था और जीवनभर के लिए मुफ्त रेलवे पास दिया गया था। बाद में उन्होंने नाटकों में अभिनय करना शुरू किया और देखते ही देखते वह फिल्मों में आ गए और अपने फिल्मी करिअर में उन्होंने लगभग 500 फिल्मों में अभिनय किया।

दिग्गज अभिनेता देवानंद के साथ उनकी काफी पटरी खाती थी, और यही वजह थी वह देवानंद के लगभग फिल्मों में नजर आ ही जाते थे। वहीं, दूसरी ओर उन्हें भोजपुरी फिल्मों का गॉड फादर भी कहा जाता है।

बता दे की नजीर ने देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ भोजपुरी सिनेमा उद्योग की संभावना पर चर्चा की थी। नजीर ने पहली भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मैय्या तोहे पियारी चढ़ाइबो’ बनाई, जो साल 1963 में आई थी।

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नजीर भोजपुरी फिल्म ‘हमार संसार’ से निर्माता बने और इसका निर्देशन भी किया। नजीर को 1970 के दशक के अंत में हिट भोजपुरी फिल्म ‘बलम परदेसिया’ के लिए भी जाना जाता था।

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